बॉर्डर पार वाला गांव !!

तुम उस बॉर्डर पार वाले गांव को तरह हो गई हो…!!
जहां का हमें कुछ नहीं पता…!!
सिर्फ लगता है… वो हमसे नफ़रत करते हैं…!!
पर जब ख़ुद में झाका तो…!!
तो.. ऐसा लगा हम भी तो बॉर्डर पार वाले हैं…!!
क्या हम उनसे नफ़रत करते हैं…?
जवाब तो सामने था मेरे…!!
पर अब किसे कहता…?? किसे सुनता…??
क्यों की लोग तो देश की मीडिया हो गए हैं…!!
चीजों को तोड मरोर के पेश करते हैं…!!
इसलिए मैं खुद में सोचता हूं…!!
की….!!
प्यार तो है हम दोनों के बीच था…!!
लेकिन हम दोनों के बीच…वो बॉर्डर जैसे तारे बिछ चुकी है…!!
गलत फेहमियों की तारे…!!
जो अब लगता है…!!
चाह के भी ख़तम नहीं होंगी…!!
तो अब इंतेज़ार करते हैं…!!
फ़िर से…!! फ़िर से…!!
उसी प्यार की…!! एक और मुलाक़ात की…!!
जैसे बटवारे से पहले थी… हमारे देश में…!!
पर अब मुश्किल है…!!
अब इस जहां में नहीं तो.. उस जहां में सही…!!
जहां कोई बंदिशें नहीं होंगी…!!
और…!! वहां ना कोई बॉर्डर की तारे होंगी…!!
वहां सिर्फ हम होंगे…!!
सिर्फ हम…!!
हम तुम !!

~आकाश राजपूत

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